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08 December, 2021

08 December

CDS बिपिन रावत का चौपर क्रैश, सवार 14 में से 13 लोगों की चली गई जान



नई दिल्ली :

तमिलनाडु के ऊटी में एक सैन्य हेलीकॉप्टर बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त हो गया है जिसमें बड़ी खबर यह है कि इस  हेलीकॉप्टर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत और उनकी पत्नी समेत भी सवार थे ।


सूत्रों ने बताया कि स्थानीय सैन्य अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं और उन्हें बताया गया है कि स्थानीय लोग 80 प्रतिशत जले हुए दो शवों को स्थानीय अस्पताल ले गए हैं । दुर्घटना के क्षेत्र में कुछ शवों को नीचे की ओर देखा जा सकता है। शवों को निकालने और पहचान की जांच के प्रयास जारी हैं। हादसे की जो तस्वीरें सामने आई हैं, उसमें हेलिकॉप्टर पूरी तरह क्षतिग्रस्त नजर आ रहा है और उसमें आग लगी हुई है । जनरल बिपिन रावत की स्थिति के बारे में अभी कुछ भी आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है ।


इससे पहले दुर्घटना में तीन यात्रियों के घायल होने की भी सूचना मिली थी जिन्हें लगिरी जिले के वेलिंगटन छावनी में ले जाया गया था। बता दें कि जनरल बिपिन रावत 31 दिसंबर 2016 से 31 दिसंबर 2019 तक सेना प्रमुख के पद पर रहे । उन्होंने 1 जनवरी 2020 को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का जिम्मा संभाला


हेलिकॉप्टर में सवार लोगों की सूची


हेलिकॉप्टर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी, रक्षा सहायक, सुरक्षा कमांडो और वायुसेना के पायलट समेत कुल 14 लोग सवार थे जिनमें से 9 लोगों के नाम आए सामने :-


1. जनरल बिपिन रावत


2. मधुलिका रावत


3. ब्रिगेडियर एलएस लिद्दर


4. ले. क. हरजिंदर सिंह


5. नायक गुरसेवक सिंह


6. नायक. जितेंद्र कुमार


7. लांस नायक विवेक कुमार


8. लांंस नायक बी. साई तेजा


9. हवलदार सतपाल ।


Courtesy

18 August, 2021

18 August

ओलंपिक में भाग लेने वाली भारतीय हॉकी टीम के हर खिलाड़ी को मिली 10 लाख रुपए की राशि और ...

  


भुवनेश्वर : ओडिशा के CM नवीन पटनायक ने सराहनीय ऐलान किया -

भारतीय हॉकी टीमों के लिये अगले 10 साल तक ओडिशा सरकार स्पॉन्सर करेगी ।

सम्मान समारोह में प्रत्येक खिलाड़ी को 10 लाख रुपये से सम्मानित किया गया और प्रत्येक सहयोगी स्टाफ को  5 लाख रुपये प्रदान किये गये ।


10 August, 2021

10 August

यूनियन जैक को फाड़ने और तिरंगा फहराने के जुर्म में अंग्रेजों ने इनको जिन्दा या मुर्दा पकड़ने पर इनाम घोषित किया था, जानिए ऐसे क्रांतिकारी राष्ट्रभक्त को !


 


     9 अगस्त का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बहुत बड़ा महत्व है । इसी दिन 1942 में अंग्रेजों के विरुद्ध भारत छोड़ो नाम से अंतिम आंदोलन छेड़ा गया था । जिसे अगस्त क्रांति दिवस का नाम दिया गया । यह अगस्त क्रांति दिवस प्रत्येक भारतवासी को राष्ट्रभक्ति के जज्बे से सराबोर होने की सीख देता है । क्योंकि इस आंदोलन से ब्रितानिया हुकूमत की चूलें हिल गई थी ।

भारत को अग्रेंजो की गुलामी के गहन गहवर से मुक्त कराने के लिए जिन तमाम वीर सपूतों ने समय समय पर क्रांति का विगुल फूंका उन्हीं में एक नाम राजबली यादव का भी है । जिनकी चर्चा के बिना अगस्त क्रांति की चर्चा अधूरी रह जायेगी । वास्तव में राजबली यादव स्वतंत्रता संग्राम में पूर्वाचल व अवध के योद्धाओं के महानायक थे । आजादी की लड़ाई में इस सपूत की अहम भूमिका रही । बाद में सक्रिय राजनीति में दखल दिया ।कालांतर में किसानों, मजदूरों व दलितों शोषितों के आदर्श बने । इस दौरान सामंती ताकतों की आंखो की किरकिरी बने रहे । 



राजबली यादव ने गुलामी के दौर में अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लिया और आजादी के बाद अवध की धरती पर देशी अन्ग्रेजो यानी सामंतो के उत्पीड़न के शिकार किसानों, मजदूरो व अन्य शोषित तबकों की आवाज जीवन पर्यत बुलंद किया ।  9 अगस्त  यानी अगस्त क्रांति दिवस की वर्षगाँठ पर इस महा सपूत की पुण्यतिथि है ।

भारत मां के अमर सपूतों की एक लम्बी फेहरिस्त में शामिल राजबली यादव का जन्म 7 नवम्बर 1906 को अवध की धरती अम्बेडकरनगर जनपद की जलालपुर तहसील के अरई गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था । चूंकि इनके पिता रामहर्ष यादव एक किसान थे इसलिए उनके साथ रहकर किसानों और मजदूरों की पीडा से वे बचपन में ही वाकिफ हो गये थे । राजबली यादव अभी कक्षा पांच में पढ ही रहे थे कि सन् 1919 में हुए जलियावाला बाग हत्याकाण्ड ने इनके बाल मन को उद्वेलित कर दिया । महज तेरह वर्ष की अवस्था में इनके अंतस में हुए क्रांति के बीजारोपण ने इन्हें क्रांतिकारी बना दिया । फिर किशोरो की टीम बनाकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाम के मन में क्रांति की भावना जगाते हुए सन् 1930 में महात्मा गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन में शामिल होकर सक्रिय क्रांतिकारी बन गये । फिर उन्होने कभी पीछे मुडकर नही देखा । अंग्रेजो के विरूद्ध तत्समय के किसी भी आन्दोलन में वे हमेशा आगे रहे। सन् 1930 में पहली बार जेल जाने के बाद जेल की दहशत भी समाप्त हो गयी।

सन् 1931 के व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन से लेकर सन् 1942 के भारत छोडो आन्दोलन तक सभी में राजबली यादव ने बढ चढकर हिस्सा लिया । इस दौरान उनकी जेल यात्राओं का क्रम थमा नहीं और प्रदेश की विभिन्न जेलों की दर्जनों बार यात्राएं की । इस दौरान ब्रितानी हुक्मरानों द्वारा दी गयी कठोर यातनाओ और ढाये गये जुल्मों सितम का डटकर मुकाबला भी किया । इस दौरान आजादी के तराने गाते हुए तिरंगे की शान बढ़ाया । जेलों मे तनहाई की सजा के दौरान फिरंगियों के कोडे से इनका बदन तमाम बार लहू लुहान हुआ मगर मन विचलित नही हुआ। साहस और आत्मबल की बदौलत फैजाबाद, हरदोई, जौनपुर, लखनऊ और उन्नाव जेलों की मजबूत दीवारें भी उन्हें ज्यादा दिनो तक कैद न रख सकी । तत्कालीन फैजाबाद जनपद के पूर्वाचल में स्थित राजेसुल्तानपुर की बाग में जनसभा के दौरान भारतीय नागरिकों पर जुल्म ढाने वाले दरोगा को मारने और गाजे बाजे के साथ उसका शव सरयू में प्रवाहित करने जैसे साहसिक कार्य में क्रांतिकारी बसुधा सिंह के साथ राजबली यादव प्रमुख रूप से शामिल रहे । राजेसुल्तानपुर थाने पर लगे यूनियन जैक को फाडने और तिरंगा फहराने के जुर्म में तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत ने श्री यादव को जिन्दा या मुर्दा पकड़ने का फरमान जारी करते हुए इन पर इनाम भी घोषित किया था । मगर वे पुलिस की पकड से दूर रहे । इस दौरान उनके घर की कुर्की कर परिजनों को भी प्रताडित किया गया । एक बार लगातार कई दिनों तक होती रही बरसात में ब्रितानी पुलिस ने इनका घर घेर रखा था और इनकी बीमार मां व भतीजे को घर में घुसने नही दिया । नतीजा यह हुआ कि बाहर खडे खडे भीगते हुए ही दोनो ने दम तोड दिया ।


क्रांतिकारी पक्ष की ही तरह इनका सृजनात्मक पक्ष भी मजबूत रहा हैं । अंग्रेजी हुक्मरानों की दमनात्मक कार्रवाई, सामंतशाही के उत्पीड़नात्मक रवैये तथा भारतीय नागरिकों की लाचारी को आधार बनाकर श्री यादव ने जेल में रहते हुए गद्य व पद्य साहित्य का सृजन भी किया । जिसमें कमजोरों को ताकत देने वाले शब्दों का प्रयोग किया गया है । जेल की त्रासदी भरे जीवन काल में राजबली यादव ने अवधी व भोजपुरी मिश्रित बोली में ‘‘धरती हमारी है‘‘ नाटक लिखा जो आगे चलकर जनजागरण का हथियार बना ।

संघर्षो के इसी कड़ी में 15 अगस्त 1947 को आजादी की किरण फूटने के बाद कई वर्षो तक किसानो और मजदूरों के हक में देखा गया सपना जब साकार होता न दिखा तो राजबली यादव ने सामंतशाही के विरूद्ध दूसरा जनान्दोलन नाटक मंडली बनाकर शुरू किया । तत्समय चल रही चकबंदी प्रक्रिया में सामंतवादी शक्तियों के दबाव मे किसानो व मजदूरों की उपेक्षा के खिलाफ जनान्दोलन चलाते हुए श्री यादव ने कम्युनिष्ट पार्टी की सदस्यता ग्रहण किया और बिना पैसा लिए उत्तर प्रदेश के तमाम गांवो समेत देशभर में धरती हमारी हैं नाटक का मंचन कर लोगों को जगाया । उनके इस चर्चित नाटक के दौरान सामंती ताकतों ने अनेकों बार उन पर कातिलाना हमला कराकर उनका उत्पीड़न किया । अनेकों बार फर्जी मुकदमों में फसाकर सामंतवादियों ने उनकी आवाज दबाने का भरसक प्रयास किया । फिर भी इस क्रांतिबीर की क्रांति यात्रा अनवरत जारी रही ।


समय के साथ हर गरीब की आवाज बन चुके राजबली यादव सन् 1967 के आम चुनाव में तत्कालीन मया - अमसिन विधानसभा क्षेत्र से कम्युनिष्ट पार्टी के टिकट पर विधायक भी चुने गये । उनकी बढ़ती लोकप्रियता तथा संघर्ष शक्ति से जल उठी सामंती ताकतों ने साजिश के तहत एक मुकदमें में फसाकर सजा दिला दिया । परिणामतः उन्हें विधानसभा की सदस्यता से भी त्यागत्र देना पड़ा, लेकिन नाटक के जरिए उन्होंने जागरूकता अभियान जारी रखा और फिर कभी चुनाव नही लड़े । उनका अंतिम समय पैतृक गांव अरई में बीता । जहां 9 अगस्त 2000 को उन्होंने अंतिम सांस ली । एक सच्चे देश भक्त व स्वाधीनता सेनानी के रूप में स्थापित हुए राजबली यादव के बताए रास्ते पर चलने वाले उनके अनुयायी उन्हें शारीरिक रूप में बिदा करने के बाद भी यश काया में उन्हें जिंदा मान रहे है । वास्तव में राजबली यादव के दिल में मातृभूमि व राष्ट्र के प्रति प्रेम व समर्पण का ऐसा जज्बा था जिसने उन्हें सुख की नींद नहीं सोने दिया । जब सारा देश सोता था तब वे अपनी मण्डली के साथ अंग्रेजों के विरूद्ध योजनाएं बनाते थे और फिर सबके साथ जागते हुए उसे मूर्तरूप देते थे । जब आजादी मिली तब उन्होंने यही जज्बा देश के गरीबों मजदूरों और किसानों के प्रति दिखाया ।

इस रणबांकुरे से जुडा सर्वाधिक दुखद पहलू यह है कि जीते जी अंग्रेजो और सामन्ती ताकतों से सदा जूझते रहे राजबली यादव ने जब आंखे मूंदी तो उनके पैतृक गाव में स्मारक आदि को कौन कहे गांव में समाधि के लिए दो गज जमीन के भी लाले पड़े हुए हैं । वास्तव में राजबली यादव जैसे व्यक्तित्व का जन्म युगों में में होता है । जिन मूल्यों को लेकर उन्होंनें संघर्ष किया था, आज उनका क्षरण हो रहा है ।

               - (राकेश यादव, लखनऊ)

29 July, 2021

29 July

यूपी में फूलन देवी की प्रतिमा लग सकती है तो विकास दुबे और श्रीप्रकाश शुक्ला की प्रतिमा भी लगवाऊंगा, ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष का ऐलान

 



कानपुर :

यूपी की सियासत में इस समय ब्राह्मण को रिझाने और अपने पाले की हर संभव कोशिश हो रही है । बहुजन समाज पार्टी के अयोध्या में ब्राह्मण सम्मेलन के बाद सपा ने पूर्वांचल में ब्राह्मण सभा की घोषणा कर नई टीम बना डाली हैv। अब भाजपा सरकार भी अपने मंत्रिमंडल विस्तार में ब्राह्मण ब्रह्मास्त्र चल सकती है । यूपी की सियासी दंगल में के बीच अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने यह बयान देकर नई सनसनी मचा दी है कि यदि फूलन देवी की प्रतिमा लग सकती है तो ब्राह्मणों के महापुरुष विकास दूबे और श्रीप्रकाश शुक्ला की प्रतिमा भी लगेगी ।


बीते दिनों कानपुर के चौबेपुर स्थिति ग्राम बरुआ में भगवान परशुराम मंदिर के भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने भरे मंच से घोषणा की कि ब्राह्मण महासभा यूपी में प्रकाश शुक्ला और विकास दुबे की प्रतिमा स्थापित कराएगी। उन्होंने कहा कि जब फूलन देवी डकैत और ददुआ डकैत की प्रतिमा उनका समाज लगाता है जो घोषित डकैत थे तो जो ब्राह्मणों के महापुरुष और वीरता के प्रेरणास्रोत हैं उनकी प्रतिमा क्यों नहीं लग सकती है। पूरा ब्राह्मण समाज इसका समर्थन करता है ।

19 July, 2021

19 July

पान का इतिहास, भूगोल, महत्व आदि सबकुछ जानने के लिए पढ़िए ...


भारत :

    पान भारत के इतिहास एवं परंपराओं से गहरे से जुड़ा है । इसका उद्भव स्थल मलाया द्वीप है । पान विभिन्न भारतीय भाषाओं में अलग-अलग नामों से जाना जाता है जैसे ताम्बूल (संस्कृत), पक्कू (तेलुगू), वेटिलाई (तमिल और मलयालम), नागवेल ( मराठी) और नागुरवेल (गुजराती) आदि । पान का प्रयोग हिन्दू संस्कार से जुड़ा है, जैसे नामकरण, यज्ञोपवीत आदि । वेदों में भी पान के सेवन की पवित्रता का वर्णन है ।

पान एक ऐसा वृक्ष है जिसे अंगूर-लता की तरह ही उगाया जाता है । पान का कोई फल नहीं होता और इसे केवल इसकी पत्तियों के लिए ही उगाया जाता है । इसे प्रयोग करने की विधि यह है कि इसे खाने से पहले सुपारी ली जाती है, यह जायफल जैसी ही होती है पर इसे तब तक तोड़ा जाता है जब तक इसके छोटे-छोटे टुकड़े नहीं हो जाते और इन्हें मुँह में रख कर चबाया जाता है । इसके बाद पान की पत्तियों के साथ इन्हें चबाया जाता है ।




पान में वाष्पशील तेलों के अतिरिक्त अमीनो अम्ल, कार्बोहाइड्रेट और कुछ विटामिन प्रचुर मात्रा में होते हैं । पान के औषधीय गुणों का वर्णन चरक संहिता में भी किया गया है । ग्रामीण अंचलों में पान के पत्तों का प्रयोग लोग फोड़े-फुंसी उपचार में पुल्टिस के रूप में करते हैं । हितोपदेश के अनुसार पान के औषधीय गुण हैं बलगम हटाना, मुख शुद्धि, अपच, श्वांस संबंधी बीमारियों का निदान । पान की पत्तियों में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है । प्रात:काल नाश्ते के उपरांत काली मिर्च के साथ पान के सेवन से भूख ठीक से लगती है । ऐसा यूजीनॉल अवयव के कारण होता है । सोने से थोड़ा पहले पान को नमक और अजवायन के साथ मुंह में रखने से नींद अच्छी आती है । यही नहीं पान सूखी खांसी में भी लाभकारी होता है ।


यह तांबूली या नागवल्ली नामक लता का पत्ता है । खैर, चूना, सुपारी के योग से इसका बीड़ा लगाया जाता है और मुख की सुंदरता, सुगंधि, शुद्धि, श्रृंगार आदि के लिये चबा चबाकर उसे खाया जाता है। इसके साथ विभिन्न प्रकार के सुगंधित, असुगंधित तमाखू, तरह तरह के पान के मसाले, लवंग, कपूर, सुगंधद्रव्य आदि का भी प्रयोग किया जाता है । मद्रास में बिना खैर का भी पान खाया जाता है । विभिन्न प्रदेशों में अपने अपने स्वाद के अनुसार इसके प्रयोग में तरह तरह के मसालों के साथ पान खाने का रिवाज है । जहाँ भोजन आदि के बाद, तथा उत्सवादि में पान बीड़ा लाभकर और शोभाकर होता है वहीं यह एक दुर्व्यसन भी हो जाता है । तम्बाकू के साथ अधिक पान खानेवाले लोग प्राय: इसके व्यसनी हो जाते हैं । अधिक पान खाने के कारण बहुतों के दाँत खराब हो जाते हैं- उनमें तरह तरह के रोग लग जाते हैं और मुँह से दुर्गंध आने लगती है ।




वैज्ञानिक दृष्टि से पान एक महत्वपूर्ण वनस्पति है । पान दक्षिण भारत और उत्तर पूर्वी भारत में खुली जगह उगाया जाता है, क्योंकि पान के लिए अधिक नमी व कम धूप की आवश्यकता होती है । उत्तर और पूर्वी प्रांतों में पान विशेष प्रकार की संरक्षणशालाओं में उगाया जाता है । इन्हें भीट या बरोज कहते हैं। पान की विभिन्न किस्मों को वैज्ञानिक आधार पर पांच प्रमुख प्रजातियों बंगला, मगही, सांची, देशावरी, कपूरी और मीठी पत्ती के नाम से जाना जाता है । यह वर्गीकरण पत्तों की संरचना तथा रासायनिक गुणों के आधार पर किया गया है । रासायनिक गुणों में वाष्पशील तेल का मुख्य योगदान रहता है । ये सेहत के लिये भी लाभकारी है । खाना खाने के बाद पान का सेवन पाचन में सहायक होता है ।


 (स्रोत : विकिपीडिया)

18 July, 2021

18 July

पूर्व क्रिकेटर और सांसद नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस ने पंजाब का प्रदेश अध्यक्ष बनाया

 


 दिल्ली :  भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी नवजोत सिंह सिद्धू वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के नेता हैं । सिद्धू लोकसभा के सांसद भी हैं । वो टीवी पर कॉमेडीयन के रूप में भी बहुत लोकप्रिय हैं ।



सिद्धू की लोकप्रियता को देखते हुए पंजाब में विधानसभा चुनाव से पहले ही उन्हें पंजाब कांग्रेस कमेटी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है ।

इस बार सिद्धू के साथ साथ 4 अन्य नेताओं को पंजाब कांग्रेस कमेटी का कार्यवाहक अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया है ।

18 July

भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ी शिवम दुबे ने अपनी प्रेमिका अंजुम खान से किया निकाह, तस्वीरें वायरल




दिल्ली : 

 भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर शिमव दुबे ने अपनी गर्लफ्रेंड अंजुम खान से शादी कर ली है । अपनी शादी की खबर खुद शिवम दुबे सोशल मीडिया के जरिए तस्वीरें पोस्ट करते हुए दी, उन्होंने सोशल मीडिया पर तीन तस्वीरें शेयर करते हुए अपने चाहने वालों के साथ खुशखबरी शेयर की ।

देखिए तस्वीरें ...










18 July

क्या आप जानते हैं कि एक किलो घी बनाने में मात्र 23 रुपए की लागत आती है, पढ़िए ...




 कानपुर :  चमड़ा सिटी के नाम से मशहूर कानपुर में जाजमऊ से गंगा जी के किनारे किनारे 10 -12 किलोमीटर के दायरे में आप घूमने जाओ, तो आपको नाक बंद करनी पड़ेगी ।


 यहाँ सैंकड़ों की तादात में गंगा किनारे भट्टियां धधक रही होती हैं,  इन भट्टियों में जानवरों को काटने के बाद निकली चर्बी को गलाया जाता है,


इस चर्बी से मुख्यतः 3 चीजे बनती हैं -


1- एनामिल पेंट (जिसे हम अपने घरों की दीवारों पर लगाते हैं)


2 - ग्लू (फेविकोल इत्यादि, जिन्हें हम कागज, लकड़ी जोड़ने के काम में लेते हैं)


3 - और तीसरी जो सबसे महत्वपूर्ण चीज बनती है वो है "शुध्द देशी घी"


जी हाँ " शुध्द देशी घी" यही देशी घी यहाँ थोक मंडियों में 120 से 150 रूपए किलो तक भरपूर बिकता है । इसे बोलचाल की भाषा में "पूजा वाला घी" बोला जाता है, इसका सबसे ज़्यादा प्रयोग भंडारे कराने वाले करते हैं । लोग 15 किलो वाला टीन खरीद कर मंदिरों में दान करके पुण्य कमा रहे हैं ।


इस "शुध्द देशी घी" को आप बिलकुल नही पहचान सकते । बढ़िया रवे दार दिखने वाला ये ज़हर सुगंध में भी एसेंस की मदद से बेजोड़ होता है ।


  औधोगिक क्षेत्र में कोने कोने में फैली वनस्पति घी बनाने वाली फैक्टरियां भी इस ज़हर को बहुतायत में खरीदती हैं, गांव देहात में लोग इसी वनस्पति घी से बने लड्डू विवाह शादियों में मजे से खाते हैं । शादियों पार्टियों में इसी से सब्जी का तड़का लगता है । जो लोग जाने अनजाने खुद को शाकाहारी समझते हैं । जीवन भर मांस अंडा छूते भी नहीं । क्या जाने वो जिस शादी में चटपटी सब्जी का लुत्फ उठा रहे हैं उसमें आपके किसी पड़ोसी पशुपालक के कटड़े (भैंस का नर बच्चा) की ही चर्बी वाया कानपुर आपकी सब्जी तक आ पहुंची हो । शाकाहारी व व्रत करने वाले जीवन में कितना बच पाते होंगे अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है । अब आप स्वयं सोच लो आप जो वनस्पति घी आदि खाते हो उसमे क्या मिलता होगा ।


कोई बड़ी बात नही कि देशी घी बेंचने का दावा करने वाली कम्पनियाँ भी इसे प्रयोग करके अपनी जेब भर रही हैं। इसलिए ये बहस बेमानी है कि कौन घी को कितने में बेच रहा है, अगर शुध्द घी ही खाना है तो अपने घर में गाय पाल कर ही आप शुध्द खा सकते हो, या किसी गाय भैंस वाले के घर का घी लेकर खाएँ, यही बेहतर होगा ।


   (C/P : सोशल मीडिया)

11 July, 2021

11 July

यूपी की राजधानी लखनऊ में पकड़े गए अलकायदा के दो आतंकवादी

 


लखनऊ :


यूपी एटीएस का लखनऊ में बड़ा ऑपरेशन, अलकायदा के 2 आतंकवादी पकड़ने का दावा, लखनऊ के दुबग्गा इलाके में पकड़े गए आतंकी, कुछ विदेशी असलहे भी बरामद हुए हैं, जीके गोस्वामी की अगुवाई में ऑपरेशन, एक हफ्ते से आतंकियों को ट्रेस कर रही टीम । पकड़े गए आतंकियों के कनेक्शन अलकायदा से,प्रेशर कूकर बम के मटेरियल भी बरामद हुए, बम स्क्वायड को मौके पर बुलाया गया, आस पास के मकानों को खाली कराया गया,एटीएस ने मकान को अपने घेरे में लिया ।

दोनों ही ट्रेंड आतंकी हैं । इनकी योजना तीन दिन में लखनऊ में एक सांसद के साथ अन्य भाजपा नेताओं को बम विस्फोट में उड़ाने की थी । इनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक मिला है । इस मकान से एटीएस को दो प्रेशर कुकर बम तथा एक अर्धनिर्मित टाइम बम मिला है । बम को निष्क्रिय करने के लिए बम डिस्पोजल स्क्वॉड मौके पर पहुंचा है । प्रेशर कुकर बम को निष्क्रिय करने की तैयारी के बीच में पता चला है कि यहां पर मौजूद लोगों की योजना तीन के अंदर भाजपा के सांसद व अन्य नेताओं को बम से उड़ाने की थी ।


(Via सोशल मीडिया)

09 July, 2021

09 July

दीदी ने दादा के घर जा कर जन्मदिन की दी बधाई , देखिए तस्वीरें



  कोलकाता :

  भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और धुरंधर बल्लेबाज सौरभ गांगुली के जन्मदिन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी की मुखिया ममता बनर्जी ने उनके घर जा कर बधाई दी ।

 इस अवसर पर दादा सौरभ ने दीदी ममता को अपना घर दिखाया और परिवार के सभी सदस्यों से मिलवाया ।








08 July, 2021

08 July

डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं में हुई बेतहाशा बृद्धि को वापस लिया जाए


आज़मगढ़ :

संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देश मे लगातार बढ़ती हुई पेट्रोल, डीजल ,रसोई गैस व अन्य आवश्यक वस्तुओं के मूल्यों में हुई बेतहाशा वृद्धि पर भारी नाराजगी व्यक्त किया गया ।


मोर्चे के आह्वान पर जिलाधिकारी आज़मगढ़ के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति जी को ज्ञापन देते हुए आज़मगढ़ जिले के किसान, छात्र, नौजवान संगठनों के प्रतिनिधियों ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया ।


हमारी मांग है कि- डीजल, पेट्रोल ,रसोई गैस सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं में हुई बेतहाशा बृद्धि को वापस लिया जाए, तीनों किसान विरोधी काले कानून वापस हो, बिजली बिल 2020 वापस हो, किसान आंदोलन में भाग लेने वालों का उत्पीड़न बंद किया जाए, किसान आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवारों को समुचित मुआवजा दिया जाए ।


विरोध प्रदर्शन में जनवादी लोक मंच के रवींद्र नाथ राय, किसान सभा के वेद प्रकाश उपाध्याय, किसान महासभा के विनोद सिंह, रिहाई मंच के राजीव यादव, उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन के जियालाल व कामरेड रामबृक्ष और अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र मंच के राहुल सहित अम्बिका पटेल, रामनिहोर, विनोद  यादव, हीरालाल यादव आदि लोग उपस्थित रहें ।


कलेक्ट्रेट परिसर में मार्च निकालकर महंगाई के खिलाफ नारेबाजी करते हुए,पेट्रोलियम पदार्थों की मूल्य वृद्धि वापस लो,कंपनियों की मुनाफाखोरी बंद करो, काले कृषि कानून वापस लो, बिजली बिल2020 वापस लो, किसानों-मजदूरों व मेहनतकशों का उत्पीड़न बंद करो, संयुक्त किसान मोर्चा जिंदाबाद, किसान-मजदूर-छात्र-कर्मचारी एकता जिंदाबाद, इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाए गए ।


    - डॉ० रवींद्र नाथ राय ,   मो० : 9451830515

06 July, 2021

06 July

जानिए सिर्फ मिट्टी के गमलों में ही क्यों लगाने चाहिए पौधे

 


 आखिर क्यों मिट्टी के गमलों में ही पौधे लगाने चाहिए, जानिए पूरा सच -


1. मिट्टी के गमले में पानी भाप बन कर उड़ता रहता है जिससे जड़ें ठंडी रहती हैं जबकि प्लास्टिक की थैली या सीमेंट के गमले में वाष्पीकरण की प्रक्रिया नहीं हो पाती जिनसे नीचे की मिट्टी अत्याधिक गर्म हो जाती है जिससे पौधे के विकास में अवरोध उत्पन्न होता है । इसको आप स्वयं जांच सकतें हैं ।


2. मिट्टी के गमले में फालतू पानी शीघ्रता से उड़ जाता है । जबकि प्लास्टिक की थैली में फालतू पानी पौधे की जड़ों को सड़ा देता है ।


3. प्लास्टिक की थैली में लगे पौधे गरीबी की निशानी समझी जाती है जबकि मिट्टी के गमले में पौधे सुंदर लगते हैं । 


4. मिट्टी के गमले को अगर आप किरमची (गमले का रंग) कर देतें हैं तो गमले नए के नए । प्लास्टिक के गमले पुराने होने पर गन्दे हो जातें हैं ।


5. मिट्टी के गमले कई वर्षों तक चलतें हैं । जबकि प्लास्टिक की थैली की उम्र सीमित होती है । 


6. गमले के प्रयोग से आप गरीब कुम्हारों के रोजगार को ,कला को फिर से पुनर्जीवित कर सकतें हैं जबकि प्लास्टिक के कारण पूरा पर्यावरण दूषित हो रहा है ।


               इसलिए हमेशा मिट्टी के गमले में ही पौधे लगाए ।

03 July, 2021

03 July

भारत की खूबसूरत महिला क्रिकेटर प्रिया पुनिया के बारे में जानिए और उनकी वायरल तस्वीरें देखिए

 


दिल्ली :

भारत की अंतर्राष्ट्रीय महिला खिलाड़ी प्रिया पुनिया का जन्म 6 अगस्त 1996 को हुआ था ।  वो एक भारतीय क्रिकेटर हैं। वे राजस्थान की प्रतिभाशाली महिला अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेटर हैं ।


प्रिया पुनिया ने वर्ष 2019 में साउथ अफ्रिका के खिलाफ अपने एकदिवसिय करियर की शुरूआत की ।

 प्रिया पुनिया की वायरल तस्वीरें देखिए -












18 June, 2021

18 June

नताशा, देवांगना, आसिफ की रिहाई लोकतांत्रिक-संवैधानिक मूल्यों की जीत



लखनऊ : रिहाई मंच ने नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल की रिहाई को लोकतांत्रिक-संवैधानिक मूल्यों की जीत कहा. मंच ने किसान आंदोलन द्वारा भीमा कोरेगांव मामले में राज्य द्वारा फंसाए गए मानवाधिकार नेताओं की रिहाई की मांग का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक कदम बताया.


रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि जिस प्रकार जीवित रहने के लिए रोटी की ज़रूरत होती है उसी प्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति के गरिमामय जीवन जीने के लिए उसके अधिकारों की गारंटी होना भी आवश्यक है. उन्होंने कहा सरकारों द्वारा आम आदमी के इस अधिकार का अतिक्रमण किया जाता रहा है. खासकर नई आर्थिक नीति के लागू होने के बाद विकास के नाम पर खनिज से भरपूर आदिवासी क्षेत्रों को पूंजीपतियों को आवंटित करने के साथ ही वंचना का शिकार स्थानीय आबादी को जबरन विस्थापित करने के सरकारी और गैर सरकारी प्रयासों के नतीजे में उनकी बस्तियों को जलाने, हत्या, बलात्कार जैसे मानवता के खिलाफ अपराध कारित किए जाने के अनेको उदाहरण मौजूद हैं.


रिहाई मंच नेता रविश आलम ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार सारी हदें पार करते हुए मानवाधिकार नेताओं को फर्जी मुकदमों में देशद्रोह और यूएपीए की धाराओं में जेलों में कैद कर दिया है. पत्रकार, मानवाधिकार कार्यकर्ता सरकार से कोविड को लेकर सवाल कर रहे हैं तो उन पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे और नोटिस भेजे जा रहे हैं. आदिवासी और वंचित समाज के पक्ष में उठने वाली और सरकार से सवाल पूछने वाली आवाज़ों को गैर कानूनी तरीके से खामोश करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून के विरोध से लेकर सरकार की आलोचना करने वालों तक मानवाधिकार व नागरिक अधिकार नेताओं/कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, वकीलों और सामान्य जनमानस को जिस तरह से प्रताड़ित किया गया और यूएपीए, एनएसए और राजद्रोह के फर्जी मुकदमें कायम किए गए इससे न केवल मानवाधिकारों की बात करना अपराध बन गया बल्कि भारतीय लोकतंत्र भी कलंकित हुआ है. सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए मॉब लिंचिंग के मामलों पर ना कठोर कार्रवाई कर रही और न ही मुख्यमंत्री इस पर अपनी जुबान खोल रहे. एक समाज के धार्मिक स्थलों को टारगेट किया जा रहा है और टारगेट करने वाले अधिकारियों का प्रमोशन किया जा रहा है.


रिहाई मंच ने कहा कि किसान आंदोलन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को राज्य द्वारा हिंसा का शिकार बनाया गया लेकिन किसानों ने सब कुछ सहन करते हुए अपना आंदोलन जारी रखा. अब यह आंदोलन राज्य के दमन के खिलाफ ऐतिहासिक इबारत लिख रहा है जिसका न केवल स्वागत किया जाना चाहिए बल्कि इसे सशक्त बनाने के लिए हर संभव सहयोग और समर्थन किया जाना चाहिए.

08 June, 2021

08 June

एक ही चिता पर आर्मी जवान और उसकी पत्नी का हुआ अंतिम संस्कार, नम हुईं लोगों की आंखें


गया : सड़क हादसे में हुई मौत के बाद सोमवार को गुरारू थाना क्षेत्र के डीहा गांव के रहने वाले आर्मी जवान पिंटू सिंह, उनकी पत्नी काजल और बेटे रेहान का अंतिम संस्कार किया गया. गया के विष्णुपद स्थित श्मशान घाट पर आर्मी जवान और उनकी पत्नी को एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया. यह सब देखकर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं.

इसके पूर्व आर्मी जवान और उनके परिवार के शव को गया के आर्मी कैंप में लाया गया. शव को तिरंगे में लपेट कर श्मशान घाट पर लाया गया. यहां सेना के जवानों ने पुष्पचक्र अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी.

बता दें कि आर्मी जवान अपने परिवार के साथ गृह प्रवेश करने लिए मथुरा कैंट से गया के गुरारू के लिए निकले थे. रविवार की देर शाम कैमूर जिले के दुर्गावती थाना क्षेत्र में जीटी रोड पर गिट्टी से लदा ट्रक अनियंत्रित होकर कार पर पलट गया था जिसमे आर्मी जवान पिंटू सिंह, पत्नी काजल देवी और बेटे रेहान की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी. घटना में आठ साल की बेटी गंभीर रूप से घायल हो गई थी जिसे इलाज के लिए तुरंत भर्ती कराया गया था.

 (साभार)

05 June, 2021

05 June

जाति-पाति तोड़क मण्डल" के संस्थापक सदस्य व प्रख्यात साहित्यकार सन्तराम बीए को याद करके हैं



     तुलसी दास जी के "जे वर्णाधम तेलि, कुम्हारा, स्वपच, किरात, कोल, कलवारा" में से कुम्हार जाति मे जन्मे महानतम समाज सुधारक एवं साहित्यकार सन्तराम बीए जी 31 मई 1988 को स्मृतिशेष हुए ।

     सन्तराम बीए जी 14 फरवरी 1887 ई को पंजाब सूबा के होशियारपुर जनपद के बसी गांव में एक कुम्भकार जाति में पैदा हुये ऐसे महानतम समाज सुधारक हैं जिन्होंने 1909 में तमाम जातिगत टिप्पड़ियों को सुनते हुये बीए की डिग्री हासिल कर सौ के आसपास किताबों की रचना की व अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन एवं उनमें लेखन किया । 

      सन्तराम बीए जी ने 1922 में परमानन्द जी के साथ मिलकर "जाति-पाति तोड़क मण्डल" नामक ऐतिहासिक व परिवर्तनकारी संगठन का निर्माण किया । इस संगठन के वार्षिक अधिवेशन को भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर जी को 1936 में सम्बोधित करना था । बाबा साहब द्वारा अपने भाषण की जब ड्राफ्टिंग संस्था को भेजी गयी तो उसके कई सदस्यों को वह पसन्द नहीं आई जिस नाते बाबा साहब इसमें अपना ब्याख्यान तो न दे सके लेकिन वह भाषण बाबा साहब के "जाति उच्छेद" या "एनिहिलेशन आफ कास्ट" नाम से प्रकाशित हो,उनकी अनमोल कृतियों में से एक बन गया ।

       सन्तराम बीए जी ने अपने संगठन "जाति-पाति तोड़क मंडल"के मंशानुसार अपने सभी बच्चों की शादियां जाति तोड़कर कीं।सन्तराम बीए जी की पुस्तक "हमारा समाज" व "मेरे जीवन के अनुभव" भारतीय सामाजिक इंतजामात को समझने हेतु उनकी अद्वितीय रचनाएं हैं । 31 मई 1988 को महामना सन्तराम बीए जी ने अपनी अंतिम सांस ली । हम आज अपने इस महानतम पुरखा को पूरी शिद्दत से याद करते हुये उन्हें श्रद्धा सुमन समर्पित करते हैं ।

"जाति-पाति तोड़क मण्डल" के संस्थापकों में से एक व प्रख्यात साहित्यकार सन्तराम बीए जी को स्मृति दिवस पर कोटिशः नमन ।

     - चन्द्रभूषण सिंह यादव, देवरिया

02 June, 2021

02 June

बलिदानी धरती गाजीपुर का एक और फौलादी दिलेर शेर अभिषेक यादव शहीद, देखिए तस्वीरें

 

लखनऊ : 
   बलिदानी धरती गाजीपुर का एक और फौलादी दिलेर शेर 
अभिषेक यादव शहीद ।

   विधानसभा जखनियां ग्राम सभा बृंदाबन के फौजी अभिषेक यादव पुत्र रामजन्म यादव,  अपने जान की बाजी लगाकर देश की सेवा करते हुए असम के सोनितपुर में वीरगति को प्राप्त हो गए ।

अमर शहीद फौजी को भावभीनी श्रद्धांजली ।
   - राकेश यादव, लखनऊ

        शहीद फौजी अभिषेक यादव की तस्वीरें -
 






29 May, 2021

29 May

ऐसे महायोगी थे महंंथ अवेद्यनाथ, 4 - 4 बार विधायक और सांसद भी रहे ।


लखनऊ :  महंत अवेद्यनाथ का जन्म 28 मई 1921 को महंत अवेद्यनाथ जी का जन्म ग्राम काण्डी, जिला पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड में श्री राय सिंह बिष्ट के घर हुआ था । इनके बचपन का नाम श्री कृपाल सिंह बिष्ट था और कालांतर में श्री अवैद्यनाथ बनकर भारत के राजनेता तथा गुरु गोरखनाथ मन्दिर के पीठाधीश्वर थे के रूप में प्रसिद्द हुए । श्री अवैद्यनाथ जी ने हिन्दू धर्म की आध्यात्मिक साधना के साथ "सामाजिक हिन्दू" साधना को भी आगे बढाया और सामाजिक जनजागरण को अधिक महत्वपूर्ण मानकर हिन्दू धर्म के सोशल इंजीनियरिग पर बल दिया । यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हिन्दू युवा वाहिनी जैसे संगठन की प्रेरणा भी कहीं न कहीं इसी सोसल इंजीनियरिग की प्रेरणा रही थी ।

 इन्होंने 1962, 1967, 1974 व 1977 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में मानीराम सीट का प्रतिनिधित्व किया और 1970, 1989, 1991 और 1996 में गोरखपुर से लोकसभा सदस्य रहे । 36 वर्षों तक हिन्दू महासभा और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहकर हिंदुत्व को भारतीय राजनीति में गति देने वाले और सामाजिक हितों की रक्षा करने वाले महंथ अवैद्यनाथ  ने स्वयं को अवसरवाद और पदभार से स्वयं को दूर रखा और इस तरह उन्होंने राजयोग में भी हठयोग का प्रयोग बखूबी किया ।

  महंथ अवेद्यनाथ का निधन 12 सितम्बर 2014 को हो गया । ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ को नाथ परंपरा के अनुसार समाधि दी गयी ।

  (स्रोत : विकिपीडिया)

26 May, 2021

26 May

आजादी से लेकर इन्दिरा सरकार तक जो भारतीय राजनीति के फलक पर चमकते रहे ।

 


श्री चंद्रजीत यादव का जन्म 1 जनवरी 1930 को ग्राम सरूपहा जिला आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में एक मध्यम वर्गीय किसान परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम ईश्वरी प्रसाद यादव और माता का नाम श्रीमती गुजराती देवी था । उनका विवाह श्रीमती आशा यादव से 1949 में हुआ था । आपने लखनऊ विश्वविद्यालय से 1953 में उच्च शिक्षा प्राप्त की व 1954 में आज़मगढ़ में वकालत प्रारम्भ की । आप मुबारकपुर आजमगढ़ से 1947 में विधायक चुने गये तत्कालीन समय में 27 वर्ष के सबसे कम उम्र के भारतीय विधायक निर्वाचित हुये थे । 1962 में पुनः कम्युनिस्ट पार्टी से विधायक चुने गये । 1967 में वे कम्युनिस्ट पार्टी छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो गये । सन1967 में पहली बार आजमगढ़ से कांग्रेस पार्टी द्वारा सांसद निर्वाचित हुये । आप कुल चार बार लोकसभा आजमगढ़ से सांसद हुये । 25 मई, 2007 को दिल्ली में देहावसान हुआ व 27 मई, 2007 को आज़मगढ़ में दाह संस्कार सम्पन हुआ ।

चंद्रजीत यादव भारतीय राजनीतिज्ञ थे,  वह 1967, 1971 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य के रूप में, जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में और 1991 में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में आज़मगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा के लिए चुने गए । 

वह इंदिरा गांधी मंत्रालय में केंद्रीय इस्पात और खान मंत्री थे । वह कम्युनिस्ट विचारधारा से प्रभावित थे । उन्हें समाजवाद और संविधान के निर्देशक सिद्धांतों पर पूरा भरोसा था । वे एक कट्टरपंथी युवा राजनेता थे । अपनी युवावस्था के दिनों में, बलिराम यादव राजनीतिक सक्रियता में उनके साथियों में से एक थे, जो एक कम्युनिस्ट लेखक, नाटककार और कवि थे । भारत - रूस संधि व बांग्लादेश के निर्माण में महती भूमिका रही ।


25 May, 2021

25 May

आपके लिए अति महत्वपूर्ण फोन नंबर की सूची, जो आपके बहुत काम आ सकती है



 लखनऊ : प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक नम्बरो की जानकारी, यह सब टोल फ्री है -

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विद्युत सेवा                        1912


पुलिस सेवा                        112


अग्नि  सेवा                        101


एमबुलैस  सेवा                   102


यातायात  पुलिस                103


आपदा  प्रबंधन                  108


चाइल्ड लाइन                  1098


रेलवे  पूछताछ                   139


भ्रष्टाचार  विरोधी              1031


रेल  दुर्घटना                     1072


सड़क  दुर्घटना                 1073


सी एम सहायता  लाइन     1076


क्राइम  सटायर                 1090


महिला  सहायता  लाइन     1091


पृथ्वी  भूकम्प                  1092


बाल शोषण  सहायता       1098


किसान  काल  सेन्टर        1551


नागरिक  काल  सेन्टर  155300


 ब्लड बैंक         9480044444

 ये फोन नंबर आपके बहुत काम आ सकता है, इन्हें अपने फोन में सेव कर लें ।