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22 July, 2021

22 July

स्कॉलरशिप का फॉर्म भरा जानें लगा है, रखें इन बातों का ध्यान

 



लखनऊ :

उत्तर प्रदेश शासन ने 9वीं से लेकर दशमोत्तर तक के छात्रों के 2021-22 छात्रवृत्ति के आवेदन से जुड़ी तिथियां जारी कर दी है । गौतमबुद्ध नगर के जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र बहादुर सिंह ने जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग के सभी स्कूलों को इस संबंध में शासनादेश भेज दिया है । उनसे कहा गया है कि दिए गए समय सारणी के मुताबिक अध्यनरत और पात्र छात्र-छात्राओं को सूचित करते हुए आवेदन फॉर्म भरवाने की प्रक्रिया पूरी करें । 



टाइम टेबल के मुताबिक 11वीं, 12वीं और सभी दशमोत्तर कक्षाओं के लिए 15 जुलाई से 10 अगस्त तक की तिथि संस्थानों को दी गई है ।  इस दौरान सभी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थान मास्टर डाटा बेस में पात्र छात्रों की जानकारी अंकित कराएंगे । जबकि नौवीं और दसवीं कक्षाओं के लिए 20 जुलाई से 12 अगस्त तक की तिथि रखी गई है । इस दौरान सभी संस्थानों को छात्रों की जानकारी मास्टर डेटाबेस में अपलोड करानी होगी । 



दशमोत्तर कक्षाओं के छात्र-छात्राएं 20 जुलाई से 21 अक्टूबर तक छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे । जबकि 9वीं और 10वीं के लिए 20 जुलाई से 12 अक्टूबर तक का वक्त दिया गया है । इस दौरान ऑनलाइन फॉर्म भरना जरूरी होगा। ऑनलाइन फॉर्म भरने के बाद छात्रों को सारी जानकारी दिखाई देगी। अगर उसमें कोई संशोधन है, तो छात्र उसे संशोधित कर सकेंगे । दशमोत्तर छात्रों को आवेदन पत्र भरने के बाद उसकी हार्ड कॉपी और दूसरे दस्तावेज अधिकतम 1 सितंबर तक संस्थान में जमा कराना होगा । 


जबकि 9वीं और दशवीं के छात्र 18 अक्टूबर तक अपने विद्यालय पर हार्ड कॉपी जमा करा सकेंगे । जिला समाज कल्याण अधिकारी शैलेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि छात्र-छात्राओं को अपने आधार को बैंक खाते और मोबाइल नंबर के साथ लिंक करना जरूरी है । छात्रवृत्ति की राशि सीधे उसी खाते में भेजी जाएगी, जो आधार नंबर से लिंक होगा । सत्यापन के बाद आधार से जुड़े मोबाइल नंबर पर ही वन टाइम पासवर्ड (OTP) भेजा जाएगा। उन्होंने कहा है कि सभी शिक्षण संस्थान मास्टर डेटाबेस में 12 अगस्त पूरा विवरण ठीक करें ।


 (साभार)

08 June, 2021

08 June

हमारे अंदर शिक्षा के साथ साथ स्वच्छता का भी आचरण डालता है यह आचार्य

 


 दिल्ली :  जिन्हें आप तस्वीर में देख रहे हैं, वह कोई सफाई कर्मचारी नहीं, बल्कि वडोद तालुका स्कूल के प्रिंसिपल हैं, जो अपने ही स्कूल के फर्श पर पोछा लगाकर उसे चमका रहे हैं । गिरिशभाई बावलिया, 13 साल शिक्षक रहने के बाद HTAT में सफल हुए और प्राथमिक विद्यालय में प्रिंसिपल के रूप में नियुक्त हुए । अगर आप इनके इस सरकारी स्कूल में जाएंगे, जो कि वडोद गाँव के जस्दन तालुका में स्थित है, तो आप किसी भी प्राइवेट स्कूल को भूल जाएंगे, जो आजकल हजारों में फीस वसूलते हैं ।


गिरिशभाई रोज स्कूल शुरू होने से एक घंटे पहले आते हैं । प्रिंसिपल होते हुए भी, अपनी पोस्ट को बगल में रख, हाथ में झाड़ू उठा खुद सफाई करते हैं । कभी-कभी तो कचरा भी खुद ही उठाते हैं । अगर शौचालय को साफ़ करनेवाले नहीं आए, तो उस दिन वह खुद ही शौचालय भी साफ़ करते हैं ।

मैंने उनसे एक दिन पूछा, आप ऐसा क्यों करते हैं, उन्होंने कहा यह मेरा कर्तव्य है कि जब बच्चे इस विद्यालय में पढ़ने आए, तो उन्हें शिक्षा के साथ-साथ साफ़ वातावरण भी मिले । गाँव के इन बच्चो को साफ़-सफाई पढ़ाई नहीं जा सकती, इन्हें यह देखकर सीखना होगा । 'कोई भी काम छोटा नहीं होता', बच्चो को यह जरुरी बात शब्दों से नहीं सिखाया जा सकता, बल्कि आचरण से सिखाया जा सकता है ।


संस्कृत में कहते हैं, जो हमारे अंदर आचरण डालता है वह आचार्य हैं । गिरीषभाई अपने स्कूल के सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को बिना बोले ही अपने व्यवहार से यह ज़रूरी बात सिखाते हैं । इस स्कूल को पंचायत की तरफ से अनुदान भी दिया गया है । इसके साथ ही, गिरीषभाई अपनी बचत के पैसों से स्कूल में और भी सुविधाएं लाने की कोशिश कर रहे हैं । इस काम में प्रिंसिपल के साथ-साथ शिक्षक भी भरपूर मदद कर रहे हैं । उसी स्कूल में मेरे एक और दोस्त हैं जिग्नेशभाई जो शिक्षक हैं और एक बहुत अच्छे पेंटर भी हैं । जिग्नेशभाई, पूरी छुट्टी प्रिंसिपल के साथ रोज स्कूल जाते और दीवारों को रंगों से सजाते, जो बच्चो को खूब पसंद आ रहा हैै ।


जिन्हें बहाने बनाने हैं वे बहाने बनाएंगे, जिन्हें गलतियां करनी हैं वे गलतियां करेंगे, लेकिन जिन्हें काम करना है वे काम करेंगे ।


-( शैलेश सागपरिया, साभार)

31 May, 2021

31 May

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री मंत्री को सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं के विषय में लिखा पत्र



दिल्ली : कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को पत्र लिखकर सीबीएसई 12th बोर्ड परीक्षाएं कराए जाने के संबंध में विद्यार्थियों, अभिवावकों एवं शिक्षकों की बात सुनने की बात कही है । उन्होंने कहा है कि अगर सरकार विद्यार्थियों, अभिवावकों एवं शिक्षकों की बात को नजरंदाज करके परीक्षाओं को कराने के लिए आगे बढ़ती है तो उनके जीवन को खतरे में डालने की जिम्मेदारी सरकार की होगी । 


  गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने विद्यार्थियों एवं उनके अभिवावकों से सीबीएसई 12 बोर्ड परीक्षाओं के बारे में अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सुझाव मांगे थे और कहा था कि वो इन सुझावों को शामिल कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र लिखेंगी । 


प्रियंका गांधी ने अपने पत्र में कहा कि विद्यार्थियों और उनके माता- पिता के इन सुझावों को देखकर आप इन परिस्थितियों में परीक्षाएं कराने संबंधी मानवीय, भावनात्मक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण समझ सकते हैं ।


प्रियंका गांधी ने इस पत्र में यूपी के पंचायत चुनावों में कोरोना के चलते हुई मौतों का उदाहरण देते हुए कहा कि पंचायत चुनावों में कई शिक्षकों को जबरन चुनाव ड्यूटी के लिए भेजा गया था । इस लापरवाही के चलते उप्र में 1600 से अधिक शिक्षकों की मृत्यु हो गई । 


कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपने पत्र में विद्यार्थियों, अभिवावकों एवं शिक्षकों द्वारा दिए गए इन सुझावों का सार प्रस्तुत करते हुए कुछ महत्वपूर्ण सुझावों को केंद्रीय शिक्षा मंत्री को लिखकर भेजा है । कुछ सुझाव निम्नलिखित हैं  :


1- भीड़भाड़ वाले परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा देने की परिस्थितियां पूरी तरह से असुरक्षित होंगी ।


2- कई विद्यार्थियों ने सुझाया है कि अन्य देशों की तरह ही आंतरिक मूल्यांकन को मूल्यांकन का आधार बनाया जा सकता है क्योंकि इन परिस्थितियों में परीक्षाओं से विद्यार्थियों पर भारी मनोवैज्ञानिक दबाव है ।


3- कई सारे विद्यार्थियों ने सुझाया है कि एक व्यापक रणनीति बनाकर सभी विद्यार्थियों को वैक्सीन लगाकर परीक्षाओं के लिए भेजा जाए । हालांकि इसके लिए काफी देर हो चुकी है लेकिन 2022 की परीक्षाओं के लिए यह रणनीति काम कर सकती है ।


4- छत्तीसगढ़ सरकार की तरह ओपन बुक एग्जाम की विधि की संभावनाओं पर भी विचार किया जा सकता है ।


5- कई विद्यार्थियों ने बताया कि वे अपने प्रियजनों एवं परिजनों को कोरोना की दूसरी लहर में खो चुके हैं और परीक्षाएं देने की हालत में नहीं हैं ।


6- कई विशेषज्ञों ने कोरोना की  तीसरी लहर के दुष्प्रभाव बच्चों पर होने का अनुमान लगाया है । इन परिस्थितियों में परीक्षाएं कराने से तीसरी लहर की संभावना और प्रबल हो सकती है ।


7- कई सारे विद्यार्थी इन परिस्थितियों के चलते अवसादग्रस्त हो गए हैं । ऐसे में उनको परीक्षाओं में धकेलना घोर अमानवीय होगा ।


8- कुछ अभिवावकों का कहना है कि यदि सरकार इन परिस्थितियों में बच्चों को जबरन परीक्षाओं के लिए भेजती है तो किसी भी नुकसान की कानूनी जिम्मेदारी सरकार एवं सीबीएसई को लेनी होगी । 


प्रियंका गांधी ने कहा कि ये हमारी युवा पीढ़ी है । इसको सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी सरकार की है । इन परिस्थितियों में विद्यार्थियों की जान खतरे में डालकर सरकार द्वारा उन्हें जबरन परीक्षाओं के लिए धकेलना उचित कदम नहीं होगा ।

 (प्रेस विज्ञप्ति)