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18 July, 2021

18 July

क्या आप जानते हैं कि एक किलो घी बनाने में मात्र 23 रुपए की लागत आती है, पढ़िए ...




 कानपुर :  चमड़ा सिटी के नाम से मशहूर कानपुर में जाजमऊ से गंगा जी के किनारे किनारे 10 -12 किलोमीटर के दायरे में आप घूमने जाओ, तो आपको नाक बंद करनी पड़ेगी ।


 यहाँ सैंकड़ों की तादात में गंगा किनारे भट्टियां धधक रही होती हैं,  इन भट्टियों में जानवरों को काटने के बाद निकली चर्बी को गलाया जाता है,


इस चर्बी से मुख्यतः 3 चीजे बनती हैं -


1- एनामिल पेंट (जिसे हम अपने घरों की दीवारों पर लगाते हैं)


2 - ग्लू (फेविकोल इत्यादि, जिन्हें हम कागज, लकड़ी जोड़ने के काम में लेते हैं)


3 - और तीसरी जो सबसे महत्वपूर्ण चीज बनती है वो है "शुध्द देशी घी"


जी हाँ " शुध्द देशी घी" यही देशी घी यहाँ थोक मंडियों में 120 से 150 रूपए किलो तक भरपूर बिकता है । इसे बोलचाल की भाषा में "पूजा वाला घी" बोला जाता है, इसका सबसे ज़्यादा प्रयोग भंडारे कराने वाले करते हैं । लोग 15 किलो वाला टीन खरीद कर मंदिरों में दान करके पुण्य कमा रहे हैं ।


इस "शुध्द देशी घी" को आप बिलकुल नही पहचान सकते । बढ़िया रवे दार दिखने वाला ये ज़हर सुगंध में भी एसेंस की मदद से बेजोड़ होता है ।


  औधोगिक क्षेत्र में कोने कोने में फैली वनस्पति घी बनाने वाली फैक्टरियां भी इस ज़हर को बहुतायत में खरीदती हैं, गांव देहात में लोग इसी वनस्पति घी से बने लड्डू विवाह शादियों में मजे से खाते हैं । शादियों पार्टियों में इसी से सब्जी का तड़का लगता है । जो लोग जाने अनजाने खुद को शाकाहारी समझते हैं । जीवन भर मांस अंडा छूते भी नहीं । क्या जाने वो जिस शादी में चटपटी सब्जी का लुत्फ उठा रहे हैं उसमें आपके किसी पड़ोसी पशुपालक के कटड़े (भैंस का नर बच्चा) की ही चर्बी वाया कानपुर आपकी सब्जी तक आ पहुंची हो । शाकाहारी व व्रत करने वाले जीवन में कितना बच पाते होंगे अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है । अब आप स्वयं सोच लो आप जो वनस्पति घी आदि खाते हो उसमे क्या मिलता होगा ।


कोई बड़ी बात नही कि देशी घी बेंचने का दावा करने वाली कम्पनियाँ भी इसे प्रयोग करके अपनी जेब भर रही हैं। इसलिए ये बहस बेमानी है कि कौन घी को कितने में बेच रहा है, अगर शुध्द घी ही खाना है तो अपने घर में गाय पाल कर ही आप शुध्द खा सकते हो, या किसी गाय भैंस वाले के घर का घी लेकर खाएँ, यही बेहतर होगा ।


   (C/P : सोशल मीडिया)

08 June, 2021

08 June

भारत सरकार ने मई 2020 में आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है



लखनऊ : छोटे व मझोले उद्योगों (एमएसएमई) के प्रोत्साहन, वित्तपोषण और विकास के लिए सतत कार्यरत प्रमुख वित्तीय संस्थान, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) और सीआरआईएफ़ हाई मार्क, ने भारत में उद्योगों की दशा पर अपनी रिपोर्ट उद्योग स्पॉटलाइट का तीसरा संस्करण लॉन्च किया । इस रिपोर्ट में भारतीय कपड़ा और परिधान उद्योग का विश्लेषण किया गया है । 

सिडबी-सीआरआईएफ की रिपोर्ट के मुताबिक  दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र को मिले कुल कर्ज की राशि 1.62 लाख करोड़ रुपये रही है जिसमें 20 फीसदी की गिरावट देखी गयी है । मार्च 2020 में कोविड-19 के लॉकडाउन के तत्काल बाद में विनिर्माण गतिविधियों के निलंबन के कारण ऐसा हुआ है । रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र में सक्रिय ऋणों की संख्या 4.26 लाख रही ।

इस उद्योग ने बीते दो सालों में एनपीए के स्तर में तिमाही गिरावट दर्ज की है । कपड़ा उद्योग का एनपीए जहां सितंबर 2018 में 29.59 फीसदी था वहीं सितंबर 2020 में यह गिरकर 15.98 फीसदी रह गयी । दिसंबर 2020 में इन एनपीए में केवल 0.94 फीसदी की बढ़त हुयी है जो दिसंबर 2019 की तुलना में 8 फीसदी कम है ।

सिडबी-सीआरआईएफ की रिपोर्ट के मुताबिक बीते कुछ सालों से  परिधानों ने निर्यात के अधिकांश हिस्से का योगदान दिया है, इसके बाद घरेलू कपड़े और वस्त्र का स्थान है । हालांकि उद्योग स्पाटलाइट के मुताबिक दिसंबर 2020 तक निर्यात ऋण 25 फीसदी कम रहा है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक महामारी के कारण निर्यात में आई गिरावट है । इस उद्योग को दिए गए कर्ज का करीब 95 फीसदी हिस्सा छोटे व मझोले उद्योगों के पास है। अगर राज्यों के हिसाब से देखें तो कर्ज में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी महाराष्ट्र की है । 

रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि कपड़ा और परिधान निर्माण में समृद्ध 13 शीर्ष क्षेत्रों में दिसंबर 2020 तक इस क्षेत्र के कुल ऋण का 80 फीसदी हिस्सा रहा । लगभग सभी राज्यों में ऐसे जिले हैं जिनमें कपड़ा और परिधान निर्माण करने वाली कई ऋण सक्रिय इकाइयाँ हैं । मुंबई और सूरत जैसे कुछ जिलों का ऋण संविभाग यथा दिसंबर 2020 तक 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का रहा है ।

सिडबी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सिवसुब्रमणियन रमण ने कहा, “भारत में कपड़ा और परिधान उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था के सबसे पुराने और सबसे बड़े क्षेत्रों में से एक है और देश में रोजगार देने में बड़ी भूमिका रखता है ।  यह क्षेत्र, निर्यात में पांचवां सबसे बड़ा है, जो देश की निर्यात आय का 12 फीसदी और सकल घरेलू उत्पाद में 2 फीसदी का योगदान करता है । भारत, वस्त्रों के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है और इसके पास संपूर्ण विनिर्माण मूल्य श्रृंखला है। केंद्रीय बजट 2021-22 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था हासिल करने की सोच में अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखा गया है और तदनुसार, वैश्विक स्तर पर भारत की कपड़ा प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए, एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान पार्क की एकीकृत योजना (एमआईटीआरए) की घोषणा भी की गई थी, जो घरेलू बाजार में तीव्र सुधार को परिदर्शित करने के लिए प्लग एंड प्ले सुविधाओं के साथ विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार करेगी ।

सीआरआईएफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यापालक अधिकारी नवीन चंदानी ने कहा, वैश्विक महामारी के बावजूद, कपड़ा और परिधान निर्माण में समृद्ध शीर्ष तेरह क्षेत्रों में दिसंबर 2020 तक ऋण संविभाग का 75 फीसदी हिस्सा उपयोग में लाया जा रहा था ।  भारत में, परिधान और कपड़ा क्षेत्र में प्रत्येक राज्य का अपना अनूठा योगदान है । भारत सरकार ने मई 2020 में आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम के तहत एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की, जो देशभर में बुनकरों और कारीगरों सहित बड़ी संख्या में छोटे पैमाने की संस्थाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखता है ।

 (प्रेस विज्ञप्ति)

03 June, 2021

03 June

खाने वाले तेल में लगी आग, 2014 से अब तक 300% हो गया महंगा !



नई दिल्ली : भारत में सरसों के तेल के कारोबार का लगभग 40% हिस्सा अकेले अडानी ग्रुप का है और गौतम अदानी को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ी भूमिका मोदी सरकार की है । केवल एक आदमी (गौतम अडानी) को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सरकार पूरे देश के उपभोक्ताओं को सरसों के तेल के लिए तरसा रही है । सरसों के तेल के दाम में बढ़ोतरी कृत्रिम है और इसका पूरा फायदा अकेले गौतम अडानी ले रहे हैंं।
 
             पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष सरसों के उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है । अतः अतिरिक्त उत्पादन का फायदा देश के उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए , लेकिन मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण और केवल एक आदमी (गौतम अडानी) को फायदा पहुंचाने के चक्कर में पूरे देश के उपभोक्ताओं को परेशान करके रख दिया है ।

            नरेंद्र मोदी लोगों को बांटने और नफरत फैलाने वाली राजनीति करके सत्ता में आए हैं । इसी का खामियाजा जनता महंगाई , गरीबी, कुपोषण ,बेरोजगारी , दवाओं का अभाव आदि के रूप में भुगत रही है ।

              ऐसा न होता तो कोई भी सरकार जनता के मुख्य मुद्दों को नजरअंदाज नहीं कर सकती । जनता के मुख्य मुद्दे तो रोजगार, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और अच्छी शिक्षा व्यवस्था के साथ देश के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता में वृद्धि करना है , जिसमें कि मोदी सरकार पूरी तरीके से नाकाम रही है ।


- अश्वनी कुमार यादव (शोध छात्र)
 जय किसान आंदोलन, जौनपुर

21 May, 2021

21 May

GST रिटर्न भरने वालों के लिए बड़ी ख़बर जानिए क्या छूट मिली है



लखनऊ :

5 करोड़ से अधिक बिक्री वाले व्यापारियों के लिए 4 जून 2021 तक कोई लेट फीस नहीं, 20 मई से 4 जून तक 9% ब्याज, 5 जून से बाद से 18% ब्याज पड़ेगा ।

5 करोड़ से कम बिक्री वाले व्यापारी वर्गों के लिए 19 जून तक कोई लेट फीस नहीं, 20 मई से 4 जून तक कोई ब्याज नहीं, 5 जून से 19 जून तक 9% ब्याज, 19 जून के बाद से 18% ब्याज पड़ेगा ।

5 करोड़ बिक्री के ऊपर वाले जीएसटी डीलर्स ध्यान दें
अप्रैल माह का GSTR 3B आपको 20 मई 2021 तक ही भरना है । यदि आप ऐसा नहीं करते है तो 4 जून 2021 तक कोई लेट फीस तो नहीं है लेकिन आपको आपके देय कर पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा ।

5 करोड़ से नीचे की बिक्री वाले डीलर्स आप अपना अप्रैल 2021 का 3B बिना ब्याज एवं लेट फीस के 4 जून तक भर सकते हैं ।
 
अप्रैल 2021 के GSTR1 की अंतिम तिथि 26 मई 2021 है। 
April 2021 के GSTR 1 में HSN Code देना अनिवार्य है । 5 करोड़ से ऊपर की बिक्री में 6 digit और 5 करोड़ से नीचे की बिक्री में 4 digit का HSN Code जरुरी है अत: रिटर्न भेजते समय इसका ध्यान रखें ।

अप्रैल 2021 के 3B में ITC
अप्रैल 2021 के 3B में ITC आपको अपनी बुक्स के अनुसार लेनी है और इसे 2B से नहीं मिलाना है ।